भारत के महान क्रान्तिकारी व स्वतंत्रता संग्राम सैनानी रासबिहारी बोस जी की पुन्यतिथि
ऋषिकेश– भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन में समाज के हर वर्ग ने अपनी शक्ति और सामर्थ्य के अनुसार सहयोग किया और अपनी सक्रिय भूमिका निभायी। भारत को आजाद करने हेतु कुछ भारतीयों ने सीधे-सीधे अपना योगदान दिया तो किसी ने अपनी लेखनी, साहित्य, कविताओं के माध्यम से तो किसी ने अहिंसक प्रतिरोध का प्रदर्शन कर अपना योगदान प्रदान किया। ‘वंदे मातरम’ जैसी पत्रिकाओं ने राष्ट्र जागरण हेतु अद्भुत योगदान दिया और भारतीय क्रांतिकारियों में ऊर्जा, साहस और नई उमंग भरने का कार्य किया। भारत के महान क्रान्तिकारी व स्वतंत्रता संग्राम सैनानी रासबिहारी बोस जी, भारत माता के ऐसे सुपुत्र थे जिन्होंने अपनी संगठन क्षमता और लेखन के माध्यम से भारत को स्वतंत्र करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया, आज उनकी पुण्यतिथि पर भावभीनी श्रद्धांजलि। श्री रासबिहारी बोस ने गदर और आजाद हिंद फौज का संगठन एवं अनेक क्रान्तिकारी गतिविधियों का संचालन भी किया। इसके माध्यम से पूरी दुनिया के भारतीय क्रांतिकारी एक साथ आये और उस समय को एक अवसर के रूप में लेकर अपनी प्रभावी लेखनी और ओजस्वी वाणी के माध्यम से नयी क्रांति को जन्म दिया जिसने पूरे भारत को संगठित करने का कार्य किया। भारत माता के इस सैनानी ने भारत की आजादी के इंतजार में 21 जनवरी 1945 को अपने शरीर को अलविदा कह दिया। देश के जिन क्रांतिकारियों ने स्वतंत्रता-प्राप्ति हेतु अद्भुत योगदान दिया, उनमें श्री रासबिहारी बोस जी का योगदान भी महत्वपूर्ण है उन्होंने विदेश जाकर क्रांतिकारी सैनानियों की शक्तियों को एकत्र कर देश को स्वतंत्र करने हेतु योगदान प्रदान किया।

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