राज्य सरकार द्वारा मद्यनिषेध नीति बनाए जाने सम्बंधित मामले पर राज्य सरकार ने जवाब किया पेश
नैनीताल — उत्तराखंड हाईकोर्ट ने प्रदेश में राज्य सरकार द्वारा मद्यनिषेध नीति बनाए जाने सम्बंधित हाई कोर्ट के फैसले का पालन नहीं होने पर दाखिल अवमानना याचिका में सरकार की तरफ से जवाब पेश किया गया। जिसपर याचिकर्ता के द्वारा ने आपत्ति करते हुए कोर्ट को अवगत कराया कि आयुक्त आवकारी द्वारा दाखिल सपथपत्र से ही खुद साबित हो रहा है कि प्रदेश शराब ठेके व बार मे IP address युक्त CCTV कैमरा लगाने के कार्य की प्रगति हाई कोर्ट के आदेश के अनुरूप नही है। सरकार द्वारा दाखिल जबाब से याचिका कर्ता संतुष्ट नही है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने उपरोक्त कार्य मे सरकार के द्वारा रह रही कमी को पूरा करने हेतु एक माह का समय देते हुए अनुपालन रिपोर्ट पुनः एफिडेविट दाखिल करने निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई एक माह बाद होगी। गरुड़ (बागेश्वर) निवासी अधिवक्ता डी के जोशी द्वारा जनहित याचिका दायर की गई है जिसमे याचिकाकर्ता ने राज्य सरकार को आवकारी अधिनियम 1910 की धारा 37अ के अनुपालन में शराब बंदी करने हेतु दिशानिर्देश जारी करने तथा शराब के कारोबार से राज्य को हो रहे नुकसान का आंकलन कर उचित कदम उठाए जाने के लिए गुहार लगाई है। याचिकाकर्ता का कहना है पहाड़ी प्रदेश को सबसे ज्यादा बर्बाद करने वाली चीज शराब पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए । इस संबंध में याचिकाकर्ता का यह भी कहना है कि जहाँ एक तरफ आबकारी अधिनियम में शराबबंदी के विशेष प्रावधान धारा 37ए बना है वही सरकारें शराबबंदी लागू करने के वजाय साल प्रति साल शराब का व्यापार को बढ़ाया जा रहा है।

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