अस्पतालों में कर्मचारियों की कमी मरीजों को उठानी पड़ रही परेशानी
स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रसाशन कोरोना महामारी को लेकर जहां पूरी मुस्तैदी से अपने फ़र्ज़ को अंजाम दे रहा है तो वही रुड़की का सिविल अस्पताल मानो मरीजों के लिए अभी भी अधूरा दिखाई पड़ रहा है। अस्पताल की कैबीसीटी के मुताबिक़ करीब दो दर्जन से ज्यादा कर्मचारी होने चाहिए थे लेकिन वर्तमान में एक दर्जन भी पूरे नही है। कर्मचारियों की कमी का खामियाजा बाहर से आने वाले मरीजों को झेलना पड़ रहा है। आलम ये है कि अस्पताल में गर्भवती महिलाओं को भी काफी परेशानी उठानी पड़ रही है बड़ी बात ये है कि सिविल हॉस्पिटल में डाटा एंट्री करने वाले का भी कोई पद नही हैं जहां लगभग 27 कर्मचारी मौजूद होने चाहियें थे वहां अब केवल सात कर्मचारियों के बलबूते ही अस्पताल चल रहा है। एक तरफ जहां कोरोना जैसी माहमारी के चलते मरीजों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है वहीं अब डेंगू और वायरल की जांच के लिए भी लोगों की भारी भीड़ सिविल हॉस्पिटल में पहुंच रही है लेकिन प्रयाप्त संख्या में कर्मचारी ना होने का खामियाजा मरीजों को उठाना पड़ रहा है। मरीजों की भीड़ का कारण भी कर्मचारियों की कमी मानी जा रही है। इतना ही नही गर्भवती महिलाओं के पास भी किसी तरह का अस्पताल का कोई कर्मचारी मौजूद नहीं है। जिसके चलते उनका तमाम कार्य उनके तीमारदारों को ही करने पड़ रहे है। सिविल अस्पताल के सीएमएस डॉक्टर संजय कंसल का कहना है कि उनके हॉस्पिटल में आज तक भी डाटा एंट्री का कोई पद नहीं है। 27 कर्मचारियों में से केवल सात कर्मचारी अस्पताल में मौजूद हैं, कई बार स्वास्थ्य विभाग और जिलाधिकारी हरिद्वार को पत्र भेजा जा चुका है लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ है। डॉक्टर कंसल ने बताया कि कर्मचारियों की भारी कमी के चलते अस्पताल प्रबंधन भी परेशान है। जल्द ही पुनः कर्मचारियों के बारे में हरिद्वार ज़िलाधिकारी और सम्बंधित विभाग को सूचना दी जाएगी।

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