नगर निगम अधिकारियों की लापरवाही से शहर में लगता कूड़े का अंबार
शहर को साफ़ और स्वच्छ बनाने के लिए यूं तो लाखों करोड़ों खर्च किए जाते है लेकिन साफ़-सफाई सड़को पर नही बल्कि कागजों में ही दिखाई पड़ती है, और अगर गलती से उकरण खरीद लिए जाए तो वो मात्र शो-पीस बनकर या तो सोभा बढ़ाने के काम करते है या फिर उपलब्धियां गिनाने के काम आते है, और हालात जस के तस बनी रहते है। रुड़की शहर को ग्रीन सिटी क्लीन सिटी के नाम से नवाज़ा गया है, और सर्वे में रुड़की शहर साफ सफाई के मामले में अव्वल स्थान हासिल करने की उपलब्धि रखता है, लेकिन निगम अधिकारियों की लापरवाही इन तमाम उपलब्धियों को भट्टा लगाने में कोई कोर कसर नही छोड़ रहे है। निगम ने एक साल पूर्व एक ऐसा मशीन खरीदी थी जो शहर का सूखा कूड़ा या बड़े आयोजन में फैलने वाली गंदगी को समेट सके, लेकिन बिडम्बना देखिए उक्त मशीन करीब पिछले छह माह से ही निगम में धूल फांक रही है। जबकि इस मशीन पर निगम ने लाखों की रकम गवाई थी। नगर निगम रुड़की ने एक साल पहले करीब 6 लाख की लागत से एक वेक्यूम वेस्ट रोड क्लीन मशीन (जटायू) मशीन खरीदी थी जोकि शहर में सूखे कूड़े को उठाने का काम करती है। लेकिन नगर निगम की लापरवाही के चलते 6 महीने से जटायू मशीन नगर निगम परिसर में जंक खा रही है, जिससे निगम की लापरवाही साफ नजर आ रही है। वही इस मामले पर निगम के सहायक नगर अधिकारी चंद्रकांत भट्ट का कहना है कि कोविड-19 के चलते लॉकडाउन के बाद मशीन को बन्द करना पड़ा क्योंकि जटायू मशीन का काम सूखे कूड़े को उठाना है। इस दौरान शहर में कोई बड़ा आयोजन नही हुआ है इसलिए मशीन को बन्द करना पड़ा है। साथ बरसात के सीजन में इसका प्रयोग नही किया जा सकता है लेकिन बारिश का सीजन समाप्त होते ही मशीन को चालू कर सूखा कूड़ा उठाने के लिए प्रयोग किया जाएगा।

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