अहोई अष्टमी का व्रत संतान के उत्तम स्वास्थ्य, कल्याण एवं दीर्घायु हेतु
ऋषिकेश– परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने आज कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी जिसे अहोई अष्टमी कहा जाता है का आध्यात्मिक महत्व बताते हुये कहा कि अहोई अष्टमी का व्रत मातायें अपनी संतान के उत्तम स्वास्थ्य, कल्याण एवं दीर्घायु के लिये करती हैं।
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि पर्व और त्यौहार भारतीय संस्कृति का अहम हिस्सा हैं। भारत में प्रत्येक पर्व का आध्यात्मिक महत्व के साथ पर्यावरणीय महत्व भी है। बच्चों को भारतीय संस्कारों से जोड़ना और घरों में भारतीय संस्कृति को जीवंत बनाये रखना जरूरी है। साथ ही पर्वों के वास्तविक महत्व को समझना और उस संदेश को आगे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना उससे भी अधिक आवश्यक है।
पूज्य स्वामी जी ने कहा कि बच्चों के स्वस्थ और दीर्घायु जीवन के लिये प्रकृति और पर्यावरण को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त रखना नितांत आवश्यक है इसलिये पर्यावरण सुरक्षा की मुहिम में स्वंय भी जुड़े और बच्चों को भी जोड़े। पर्यावरण की सुरक्षा के लिये विशेषकर वयस्क बच्चे महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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