इस हेली कम्पनी पर UCADA के अधिकारियों की दरियादिली श्रद्धालुओं की जान पर पड़ सकती है भारी
चार धाम यात्रा-2026 की तैयारियों के तहत श्रद्धालुओं को सुगम और सुरक्षित यात्रा सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकेडा) ने केदारनाथ धाम के लिए हेली शटल सेवा का चयन प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूर्ण कर ली है.
8 हेलीकॉप्टर ऑपरेटरों का चयन इस बार यात्रा के लिए किया गया है.लेकिन इस बार एक ऐसी हेली कम्पनी कों भी केदारघाटी में उड़ान भरने की अनुमति दी गईं है जिसके पास पहाड़ों में उड़ान भरने का अनुभव ही नहीं है,जो साबित करता है कि हेली सेवाओं के जरिए जो श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शनों के लिए जाना चाहते है उनकी सुरक्षा के साथ कितना बड़ा खिलवाड़ हो सकता है.
हेली सेवाओं की दुर्घटना से भी नहीं लिया जा रहा सबक
पिछले साल यानि 2025 में चारधाम यात्रा के दौरान उत्तराखंड में चार हेलीकाप्टर दुर्घटनाओं में 11 तीर्थ श्रद्धालुओं की मौत हो गईं थी.इन हेली दुर्घटनाओं के बाद सरकार द्वारा हेली सेवाओं के लिए सख्त एसओपी बनाने की बात कहने के साथ ही यह भी कहा गया था कि अगले साल हेली सेवाओं की टेंडर प्रक्रिया में बहुत सावधानी बरती जाएगी.लेकिन इस बार हेली सेवाओं के टेंडर में कितनी सावधानी बरती यह यूनाइटेड हेलीचार्टर्स प्राइवेट लिमिटेड जो की मुंबई की कंपनी बताई जा रहीं उसकों मिलें लाइसेंस से अच्छी तरह समझा जा सकता है.दरअसल इस कम्पनी के मालिक जो मैनेजिंग डायरेक्टर सईद क़य्यूम शेख है उनकी कम्पनी के पास केदारघाटी में हेली सेवाओं के उड़ान भरने का कोई अनुभव ही नहीं है.इससे साबित होता है कि हेली सेवाओं कों चारधाम यात्रा में उड़ान भरने का जिन अधिकारियों ने लाइसेंस दिया उनको तीर्थ श्रद्धालुओं की जान की कितनी चिंता है.
बताया जा रहा है कि कुछ वर्ष पहले तक यह कंपनी क़तर के शेखों के पास थी लेकिन अब इसका संचालन सईद क़य्यूम शेख क़र रहें है.यह कम्पनी पहले मुंबई से समुद्री मार्ग में फ्लाइंग करती थी,लेकिन अब इसको केदारघाटी में उड़ान भरने की अनुमति प्रदान क़र दी गईं है.यानि समुद्र के ऊपर से उड़ान भरने वाली कम्पनी अब केदारघाटी के ऐसे पहाड़ों से बीच से तीर्थ श्रद्धालुओं कों लेकर उड़ान भरेगी जहां विजिबिलिटी बहुत कम होती है,और हर समय दुर्घटना का खतरा बना रहता है.इतना ही नहीं यह बात भी सामने आई है कि पिछले कुछ सालों से इस कम्पनी के लाइसेंस कों डीजीसीए ने सस्पेंड किया हुआ था और इसने उड़ान भी नहीं भरी.
लेकिन इस कम्पनी पर अधिकारियों की दरियादिली तों देखिए 2025 में एक 15 साल पुराना 2010 मॉडल का सेकंड हैंड हेलीकाप्टर खरीदने वाली इस कम्पनी कों वर्ष 2026 में फरवरी में टेंडर की डेट से सिर्फ एक दों सप्ताह पहले लाइसेंस भी दे दिया गया.जिस कम्पनी के पास पहाड़ों में उड़ान भरने का अनुभव ही नहीं था उसकों UCADA ने टेंडर की शर्तो में उसके मुताबिक ढील देकर उसकों भी पहाड़ों में उड़ान भरने का लाइसेंस दे दिया गया.
केदारनाथ में 11500 फ़ीट ऊंचाई पर हेलीकाप्टर उड़ाना बेहद कठिन है इसलिए पहले उसी कंपनी कों यहां हेली सेवा संचालित करने की अनुमति मिलती थी जिसके पास पहाड़ों में हेली उड़ाने का अनुभव हो.लेकिन लगता है अधिकारियों ने पिछले कुछ सालों में चारधाम यात्रा के दौरान हुए हैलीकॉप्टर हादसों से कोई सबक नहीं लिया,जिसमें दर्जनों तीर्थ श्रद्धालुओं की जाने चली गईं.
केदारनाथ जैसा ही है अमरनाथ में हेली हेलीकॉप्टर ऑपरेशन
देश में केदारनाथ जैसा ही कठिन हेलीकाप्टर ऑपरेशन अमरनाथ में भी संचालित होता है.लेकिन वहां पर हेली सेवाओं के संचालन के लिए कठोर शर्तें रखी गईं है.इन शर्तो में पहाड़ों में हेवी सेवाओं का संचालन का कम से कम कम्पनी के पास 5 साल का अनुभव हो उसके पायलटों के पास 1500 घंटो का उड़ान भरने का अनुभव हो.इतना ही नहीं अमरनाथ में 10 साल से अधिक पुराने हेलीकाप्टर कों उड़ान भरने की अनुमति भी नहीं है.लेकिन इसके विपरीत उत्तराखंड में चारधाम यात्रा की हेली सेवाओं के लिए ज़ारी शर्तो में इतनी ढील दे दी गईं कि अनुभव 5 साल का अनुभव तो छोड़िये यहां हेली सेवाओं के संचालन के अनुभव का कोई क्लॉज़ रखा ही नहीं गया.यानि जिस हेली कम्पनी के पास पहाड़ों में हेली सेवाओं के उड़ान भरने का अनुभव ही नहीं है उसे भी उड़ान भरने का लाइसेंस दे दिया गया.
कम्पनी के 2 साल का फ्री एक्सीडेंट एफिडेविट देना था अनिवार्य
चारधाम यात्रा की हेली सेवाओं के लिए लाइसेंस के लिए हेली कंपनियों से 2 साल का एक्सीडेंट फ्री का एफिडेविट माँगा गया था.लेकिन जो कंपनी 15 दिन पहले बनी है वो ये एफिडेविट कैसे देगी और इसके बावजूद भी UCADA ने एक नई और बिना पहाड़ के अनुभव वाली कंपनी को ये टेंडर दे दिया गया.जो यह बताने के लिए काफी है कि अधिकारियों ने किस प्रकार तीर्थ श्रद्धालुओं की जान के साथ समझौता क़र नियम विरुद्ध कम्पनी कों टेंडर दिया.
उड्डयन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा सरकार की आँखों में धूल झोंक क़र उसकी छवि धूमिल करने का जो प्रयास किया गया उसका संज्ञान मुख्यमंत्री कब लेते है यह देखना अब बाकि है.

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