बद्रीनाथ धाम की पहाड़ियों पर फिर भड़की आग, कुछ ही दिनों में दूसरी घटना से वन विभाग और श्रद्धालुओं में हड़कंप
चमोली / बद्रीनाथ धाम: विश्व प्रसिद्ध श्री बद्रीनाथ धाम के आसपास स्थित पहाड़ियों पर आग लगने की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद होने से ठीक पहले एक बार फिर बद्रीनाथ धाम की पहाड़ी पर आग भड़कने की सूचना सामने आई है। कुछ ही दिनों के भीतर हुई इस दूसरी घटना ने स्थानीय प्रशासन, वन विभाग और वहां मौजूद श्रद्धालुओं की चिंता बढ़ा दी है। वही बद्रीनाथ धाम की एक पहाड़ी से अचानक धुआं और आग की लपटें उठती देखी गईं। ऊंचाई वाले इस संवेदनशील क्षेत्र में आग की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम तत्काल मौके के लिए रवाना हुई। दुर्गम पहाड़ी इलाका होने के कारण आग पर काबू पाने में वन कर्मियों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है।
चार दिन पहले माता मूर्ति मंदिर के पास भी लगी थी आग
गौरतलब है कि इससे ठीक पहले 4 नवंबर को भी बद्रीनाथ धाम क्षेत्र में स्थित माता मूर्ति मंदिर के ठीक ऊपर पहाड़ी और खेतों की तरफ भीषण आग लग गई थी। सुबह करीब 10:30 बजे भड़की यह आग लगभग 200 से 300 वर्ग फीट के दायरे में फैल गई थी, जिससे पूरे क्षेत्र में धुआं भर गया था और अफरा-तफरी का माहौल बन गया था। उस समय वन विभाग, आईटीबीपी (ITBP) के जवानों और स्थानीय ग्रामीणों के संयुक्त प्रयासों से कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया था।
आग लगने के कारण और पर्यावरणीय चिंता
वन विभाग के अधिकारियों के प्रारंभिक आकलन के अनुसार, पिछली घटना में आसपास के किसानों द्वारा खेतों में बेहतर पैदावार के लिए घास या ‘आड़ा’ जलाने के कारण चिंगारी भड़की थी, जिसने विकराल रूप ले लिया। इसके अलावा, शुष्क मौसम और तेज पहाड़ी हवाएं आग को तेजी से फैलाने में मदद कर रही हैं।
बद्रीनाथ धाम जैसे उच्च हिमालयी और पारिस्थितिक रूप से बेहद संवेदनशील क्षेत्र में नवंबर के महीने में लगातार आग लगने की घटनाएं गंभीर चिंता का विषय बनी हुई हैं। एक ओर जहां इससे दुर्लभ हिमालयी वनस्पतियों और वन्यजीवों को नुकसान पहुंच रहा है, वहीं 16 नवंबर को धाम के कपाट बंद होने से पहले दर्शन के लिए पहुंच रहे हजारों तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को लेकर भी प्रशासन सतर्क हो गया है। फिलहाल, प्रशासन और वन विभाग की टीमें आग लगने के सटीक कारणों की जांच और निगरानी में जुटी हैं।

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