नो स्टडी नो फीस की मांग को लेकर मुहिम हुई शुरू
सितारगंज में नो स्टडी नो फीस की माँग को लेकर पालिका अध्यक्ष एडवोकेट हरीश दुबे के नेतृत्व में शहर से शुरू हुई मुहिम अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी पहुँच गयी है। बरूवाबाग मंदिर के सामने तमाम अभिभावकों ने दुबे के नेतृत्व में सांकेतिक धरना दिया और नो स्टडी नो फीस की माँग के समर्थन में आवाज बुलंद की।अभिभावक शुरू से लेकर अंत तक नो स्टडी नो फीस का आदेश पारित करने की ही रट लगाए रहे। अभिभावक नगरपालिका अध्यक्ष एडवोकेट हरीश दुबे के नेतृत्व में बरूवाबाग मन्दिर परिसर में एकत्र हुए उन्होंने इस दौरान निजी स्कूल संचालकों पर ऑनलाइन बच्चों को पढ़ाने व फीस के लिए दवाव डालने को लेकर विचार विमर्श किया और इसको लेकर सांकेतिक धरना दिया।इस दौरान नेतृत्व करता एडवोकेट हरीश दुबे ने कहा कि फीस और ऑनलाइन शिक्षा के दवाव को लेकर अभिभावक बुरी तरह परेशान हैं।इसको लेकर जगह-जगह आंदोलन आदि किये जा रहे हैं।बाबजूद इसके सरकार के कान पर जूं नहीं रेंग रही है।इस वजह से स्कूल संचालक भी मनमानी करने से बाज नहीं आ रहे हैं। बराबर काल व मैसेज भेजकर अभिभावकों की नाक में दम कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि इसका एकमात्र समाधान नो स्टडी नो फीस का आदेश ही है।इसके लिए अभिभावकों को एकजुट होकर सरकार को जगाने के लिए बड़ा आंदोलन खड़ा करना होगा।उन्होंने कहा कि सरकार अभिभावकों की समस्याओं को नजर अंदाज कर कोरोना के मकड़जाल में उलझी हुई है।हर तरफ कोरोना का राग अलापा जा रहा है।इस बीच आर्थिक रूप से मजबूत कुछ अभिभावक अपने बच्चों को महंगे फोन दिलवाकर ऑनलाइन शिक्षा से जुड़वा रहे हैं और साथ ही फीस जमा कराने की बात भी कह रहे हैं।लेकिन इस बीच आर्थिक रूप से कमजोर अभिभावकों की स्थिति ठीक साँप के मुँह में छछूंदर जैसी बनी हुई है। एक तरफ जहां सरकार ट्यूशन और फीस को लेकर कोई स्पष्ट दिशानिर्देश जारी नहीं कर रही है वहीं दूसरी ओर निजी स्कूल संचालक इसके लिए बराबर अभिभावकों पर दबाव बना रहे हैं और यहां तक कह रहे हैं कि यह बच्चों के भविष्य का सवाल है, इसमें गड़बड़ी होने पर अभिभावक ही जिम्मेदार होंगे। इस पर अभिभावकों ने एक दूसरे के सुर में सुर मिलाते हुए शिक्षण शुल्क सार्वजनिक करने के साथ ही नो स्टडी नो फीस का आदेश पारित करने की मांग की और जब तक इस संबंध में स्पष्ट आदेश जारी न होने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी। कहा कि जब सभी विद्यालयों में पाठ्यक्रम एक है तो शिक्षण शुल्क अलग-अलग क्यों? इस संबंध में यथाशीघ्र स्पष्ट दिशानिर्देश जारी होना चाहिए। जब तक नियमित रूप से स्कूल नहीं खुलेंगे तब तक वह फीस भी नहीं देंगे । इसको लेकर आर -पार की लड़ाई लड़ी जाएगी ।बिना वजह का शोषण किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा। अभिभावकों ने शोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए नो स्टडी नो फीस के जमकर नारे लगाए और आंदोलन गाँव-गाँव तक पहुंचने का एलान भी किया।

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