उत्तराखंड चाइल्ड बैंक के लिए बाल विकास मंत्रालय से एक करोड़ रुपए की मांग की
ललित सिंह दोसाद पूर्व सदस्य, बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायत की गई थी कि प्रदेश में आज भी बच्चे भीख मांगते हैं। उनसे श्रमिक के रुप में कार्य कराया बजाता है, शोषित, व असुरक्षित बचपन हमे शर्मीन्दा ही नही कलंकित भी करता है। अतः प्रदेश सरकार को 0-12 वर्ष के बच्चों के लिए एक चाइल्ड डाटा बैंक की अत्यंत आवश्यकता है। इस डाटा बैंक में बच्चों के पैदा होने से 12 वर्ष तक नियमित रुप से ट्रैक करे, और उनके अधिकार और कर्तव्यों के लिए गाइड करे ।तीन वर्ष से 12 वर्ष तक अनिवार्य शिक्षा हो। इस दायरे में सरकार, माता-पिता को भी लाये और बच्चों के शोषण पर कठोर कार्यवाही हो। बच्चे को पैदा होते ही एक नंबर निर्गत हो और वही उसका आधार नंबर भी हो।


प्रत्येक बाल संस्था, शिक्षा, खेल, स्वास्थ्य, बाल विकास आदि विभागों से लिंक हो और उसी के माध्यम से मॉनिटरिंग हो इस हेतु एक उच्च स्तरीय समिति बनाकर जमीनी स्तर पर वृहद सर्वे कराया जाय जिससे वास्तविक स्थिति का आंकलन हो। अतः निवेदन है कि राष्ट्र के भविष्य को शिक्षित संस्कारिक बनाया जा सके जिसके संदर्भ में उपरोक्त पत्र आयोग को प्रेषित करते हुये उचित कार्यवाही की अपेक्षा की गई है। इस मामले में पूरी जानकारी देते हुए उत्तराखंड बाल आयोग की अध्यक्ष उषा नेगी ने बताया कि बारह बर्ष तक के बच्चों का डाटा बैंक बनाने के लिए महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्रालय से एक करोड़ रुपए की मांग की है।

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