वन विभाग वा डब्ल्यूडब्ल्यूएफ नैनीताल जिले के तराई क्षेत्रों में हाथी कॉरिडोर का करेंगे सर्वेक्षण
उत्तराखंड में हाथियों की बढ़ती संख्या पर्यावरण के लिहाज से अच्छा संकेत है। लेकिन वन विभाग के लिए भी चुनौती है। वही आपसी संघर्ष के अलावा ट्रेन और सड़क हादसों में हाथियों की जान जा रही है। जोकि वन विभाग के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। इसका बड़ा कारण हाथियों के पुश्तैनी रास्ते हाथी कॉरिडोर बंद होना भी है। जिस कारण हाथी अपने मूल रास्ते से भटक कर ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में पहुंच रहे हैं. इसी को देखते हुए उत्तराखंड वन विभाग के तराई पूर्वी वन प्रभाग और वर्ल्ड वाइडलाइफ फंड (WWF) ने संयुक्त पहल करते हुए हाथियों के अपने पुश्तैनी रास्तों के सर्वे का काम शुरू किया है। प्रभागीय वनाधिकारी हिमांशु बागड़ी ने बताया कि तराई क्षेत्रों में कई हाथी कॉरिडोर हैं। मानव वन्यजीव संघर्ष की घटना और ट्रेन हादसों में हाथियों की हो रही मौत को देखते हुए हाथी कॉरिडोर संभावित क्षेत्रों को WWF की मदद से कैमरा ट्रैप से निगरानी की जा रही है। इसके अलावा हाथियों की कॉरिडोर पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तरीके से मूवमेंट की जानकारी और उसका डेटा इकट्ठा किया जा रहा है।

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